गजब की माल ममता कालिया की चूत

मित्रो मैं दिनेश अपनी सेक्सी कहानी लेकर हाजिर हूँ। मैं 25 साल का हो गया था और कोई चूत नहीं मिल रही थी। मैं एक स्कुल में पढ़ाता था और वहां कई टीचर्स पढ़ाती थी। पर साली सब की सब कहीं ना कहीं फसी हुई थी। मैंने अपने दोस्त महेश से कहा कि कोई लौण्डिया का इंतजाम कर। बहुत दिन से चूत नहीं मारी है। वो भीं चूत के दर्शन करना चाहता था। अब वो छूट का इंतजाम करने लगा। पर बहनचोद!! हम लोगों की किस्मत गधे के लण्ड से लिखी गयी थी। पर लौण्डिया की चोदने को नहीं मिल रही थी।

फिर कुछ दिनों बाद हमारे स्कुल में एक मस्त माल ममता कालिया पढ़ाने आयी। उसका नाम तो कालियाथा पर वो गोरिया था। क्या झकास मॉल थी दोंस्तों। उसे देखकर बस यही दिल कहा कि बस उसका पेटोकोट उठा दू और कसके चोद लू उसको। दोंस्तों ममता कालिया को।देख कर बस यही दिल कर रहा था। माल ही ऐसा था। मैं स्कुल मैनेजर भी था। नयी टीचर्स का इंटरव्यू में ही लेता था। ममता कालिया मेरे केबिन में इंटरव्यू।देने आयी। महेश भी मेरे साथ बैठा था।
मे आई कमिन सर?? उसने पूछा

मैंने सिर उठाकर देखा काली साली में एक नयी 23 24 साल की मस्त जवान चुदासी लड़की। मेरा तो दिन बन गया दोंस्तों। मस्त भरा बदन
यस!! प्लीज टेक सीट!! मैंने मुस्कुराकर कहा।
सर!! मैं टीचर के इंटरव्यू के लिए आई हूँ!! ममता बोली
बाप रे!! क्या मस्त रसीले ओंठ थे उसके। लग रहा था कि कोई हीरोइन है। मेरी नजरे ममता के होठों पर ठहर गयी। दिल किया अभी इसके हाथ पकड़ लू और खिंच लूँ, इसके होंठो पर ताबड़तोड़ चुम्मा ले लूँ। मैं ममता पर मर मिटा था। मेरी नजरे उसकी नाक, गाल , आँखों, गले और मस्त बड़े साइज के मम्मो पर रुक गयी थी।

साड़ी के पल्लू को देखने भर से मैं जान गया कि चीज सॉलिड है।
यस!! तो आपकी क्या क्वालिफिकेशन है ममता जी?? मैंने पूछा हँसकर मुस्कुराकर। मैं जान बूझ कर अधिक अच्छा बन रहा था।
जी मैंने मैथ्स में बीएससी और एम एस सी किया है! ममता बोली। मेरे बदल महेश बैठा था। उसने मुझे टेबल के नीचे पैर मारा। वो कहना चाह रहा था कि माल कड़क है। इसको गियर में लो। कोई चाल चलो की ये नयी टीचर ममता की चूत मारने का जुगाड़ हो जाए। मैं समझ गया। मैंने ममता से मैथ्स के कई सवाल पूछे। बंदी होशियार थी। सब बता ले गयी। फिर मैंने उसे कुछ न्यूमेरिकल्स करने को दिए। बंदी खटाखट कर ले गयी। अब कोई ऐसी चाल चलनी थी जिससे ममता अपनीं चूत दे दे।

मेरी नजरे अब भी उसके मम्मो से हट नहीं रही थी। वही मेरा दोस्त महेश भी ममता को मन ही मन चोद रहा था।
देखिये ममता जी!! आप बड़ी होशियार है। मैंने आपकी सर्टिफिकेट भी देखे है। आप थ्रू आउट फर्स्ट क्लास है!! हमे टीचर चाहिए तो जरूर पर 2 महीने बाद। असल में बात ये है कि हमारी एक टीचर ठीक से नहीं पढ़ा रही है। हम उसको 2 महीने बाद निकल।देंगे। तब आपको रख लेंगे।

ममता बड़ी उदास हो गयी। वो बड़ी झकास माल थी। जैसे खिला हुआ कमल का फूल। उसपर ऐसी उदासी नहीं जम रही थी।
देखिये सर! मुझे नौकरी की बहुत जरूरत है! मुझे घर चलाने के लिए पैसे चाहिये। कुछ दिन पहले की मेरे पिता गुजर चुके है!! वो बोली
ममता जी!! ठीक है ! मैं आपको नौकरी दे दूंगा। पर आपको हफ्ते में कम से कम 3 बार रात में मेरे घर आना होगा! तब ही ये नौकरी आपको मिल सकती है। आपको कभी पेमेंट में लेट नहीं होगा! क्या आप समझ् रही है?? मैंने पूछा

ममता जान गयी की मैं किस बारे में बात कर रहा था। वो साफ साफ जान गयी की उसकी चुदाई की बात चल रही है। मैं जान गया था कि उसे पैसों की शख्त जरूरत है। इसलिए वो चूत भी दे देगी। वो खामोश थी। कुछ सोच रही थी।
ठीक है!! मैं आज से ही ज्वाइन कर लेती हूँ!! वो बोली
ओके जाइये क्लास 7 में जाकर पढ़ाइये!! मैंने कहा।
वेलकम तो सेंट जोसफ़ स्कुल!! मैंने हाथ बढ़ाया।
थैंक यू सर!! वो बोली और मेरी तरह हाथ बढ़ाया। बहुत नरम हाथ था उसका। मैं सोचने लगा की हाथ इतना नरम है तो चूत कितनी नरम होगी।

वो पीछे मुड़ी। मैं उसका पिछवाड़ा देखा। खूब बड़ा सा चौड़ा पिछवाड़ा था। मेरी दिल खुश हो गया। मेरा लण्ड खड़ा हो गया। मैंने साड़ी के पल्लु के बगल से उसके नर्म गोरे दुधिया पेट की सलवटे भी देख ली। बस क्या बताऊँ दोंस्तों, दिल खुश हो गया। क्या माल थी ममता। सायद ऊपरवाला हमपर मेहरबान था। हम दोनों के लिए चूत का इंतजाम हो गया था। ममता क्लास में पढ़ाने चली गयी।
भाई हाथ मिलाओ!! महेश ने हाथ दिया। मैंने उसके हाथ पर हाथ मारा।
मैं स्कुल के बगल में ही रहता था। ये घर भी स्कुल के मालिक से मुझे दे रखा था। महेश और मैं ममता का इंतजार करने लगे। 8 बज गए। चारों तरह अँधेरा हो गया। महेश तो लण्ड पर हाथ फेरने लगा।

ममता सवा 8 तक आ गयी। हम तीनों अंदर आ गए।
ये क्या सर!! ये यहाँ क्यों है?? ममता ने महेश की तरह इशारा किया।
देखो ये भी मैनेजर है। इतना बड़ा स्कुल है! एक मैनेजर से तो सम्भल नही सकता! इसलिए हमारे यहाँ 2 मैनेजर है। अगर ये तुम्हारे फॉर्म पर साइन नहीं करेंगे तो तुमको नौकरी नहीं मिलेगी! मैंने ममता से कहा। ममता अब जान गयी की वो आज दो लोगो से चुदेगी। वो मेरे पास आकर बैठ गयी। मैं उसके बदन से खेलने लगा। दोंस्तों, अच्छा माल थी वो। सुरुवात मैंने उसके लिप्स चूसने से की। मैंने उसके रसीले होंठ चूसने लगा उसने हल्की बैंगनी लिपस्टिक लगा रखी थी। हाथ की उँगलियों और पैर की उँगलियों पर उसने मैचिंग बैंगनी नैलपोलिस लगा रखीं थी।

आज भी वो अपनी वाली काली रंग की साड़ी में थी। साड़ी में हल्के हल्के सुनहरे गोले बने हुए थे। बिलकुल मस्त चुदासी माल लग रही थी। मैंने उसको सोफे पर खींच लिया और लिटा दिया। मै उसके होठ के रस पीने लगा। वही महेश भी आ गया। वो ममता के गोरे सूंदर पैर चूमने लगा। ममता अभी कुंवारी थी। इसलिए पैर में बिछुआ नहीं थे। उसके पैर गोल गोल गणेश जी जैसे थे। क्या माल थी दोंस्तों! मैं उसकी जितनी तारीफ करुँ कम है। मेरे होंठ उसके मस्त होठों के ऊपर थे, उससे चिपके हुए थे। मेरे हाथ उसके पल्लु के ऊपर उसके बूब्स के ऊपर थे।

मैं मन ही मन सोचने लगा की जिस लड़के से उसकी शादी होगी उसकी तो निकल पड़ेगी। उसकी तो ऐस ही ऐश होगी। खूब चूत मारेगा उसकी। मेरे हाथ उसके बूब्स पर यहाँ वहां नाचने लगे। जबकि मेरे होंठ उसके लिप्स का शहद पी रहे थे। महेश अब ममता की टाँगों को चूम चाट रहा था। मैंने प्यार के इस अहसास में उसकी नाक, आँखों और माथे को भी चूम लिया। मेरी उँगलियाँ उसके बूब्स दबाने लगी। मैं मदहोश हो रहा था। महेश ने उसकी सारी को ऊपर उठा दिया था। अब वो ममता के घुटनो तक पहुँच गया था।

बॉप।रे!! कितने मस्त, सूंदर और गोरे घुटने थे ममता के। दोंस्तों इस लड़की को तो मैं चोद चोद कर प्रेग्नेंट कर दूंगा। मैंने सोच लिया था। मुझसे अब रहा ना गया। मैंने उसका पल्लू हटा दिया। काले ब्लॉउज़ में उसके दूध कुछ जादा ही गोरे लग रहे थे। मैंने उसके ब्लॉउज़ के बटन खोल दिये। बूब्स ऊपर आने को बेताब थे। मैंने बूब्स मुँह में लेकर पीने लगा। महेश अब ममता की जांघ तक पहुँच गया था। आज उसको डबल लण्ड दूँगा। यही सोचा था मैंने। अब हम दोनों से रहा ना गया। मैंने और महेश ने अपने अपने कपड़े निकाल दिये।

मैंने ममता कालिया का ब्लॉउज़ और वो काली साडी निकाल दी। सच कहता हूँ फ्रेंड्स किसी लौण्डिया।को काली साड़ी और काले पेटोकोट ब्लॉउज़ में चोदना, कुछ जादा ही मजा मिलेगा। मैं प्यासे ही तरह उसके बूब्स पीने लगा। बहनचोद!! माल ही माल थी। बिलकुल रबड़ी थी वो। दूध तो इतने नर्म थे की छूने में डर लग रहा था। मैंने मस्त पीने लगा। वहीँ मेरा दोस्त महेश उसकी चूत तक पहुँच गया था। उसने ममता की काली रंग की पैंटी हल्की सी बगल की तो चूत के दर्शन हो गए।

महेश ममता की चूत चाटने लगा। वहीँ मैं उसका एक बूब्स अच्छी तरह से पी चूका था। अब मैं दूसरा बूब्स पी रहा था। महेश ममता की बुर को मस्ती से झूम झूमकर पी रहा था। मैंने भी उसके बूब्स को पीने लगा। फिर मैं सबसे नीचे लेट गया। मैंने ममता को अपने ऊपर लिटा लिया। मैंने उसकी बुर में लण्ड डाल दिया। ममता की बुर ऊपर की तरफ थी। अब महेश भी आ गया। उसने ऊपर से बड़ी जुगाड़ से ममता की बुर में अपना लण्ड भी ख़ोस दिया। असल में एक बुर में 2 लण्ड आराम से चले जाते है पर साले इंडिया वाले चूतिये होते है ना।

नये नये प्रयोग करते ही नहीं है। मेरा और महेश दोनों का लण्ड ममता की बुर में चला गया था।
हाय मम्मी! मैं मर जाऊंगी!! दिनेश जी!! आपसे रिक्वेस्ट है इस तरह डबल लण्ड से मुझे मत चोदिये!! प्लीस!! वो बोली
आप दोनों मुझे सिंगल सिंगल लण्ड से चोद लीजिये!! मैं रिक्वेस्ट करती हूँ दिनेश जी!! ममता कालिया बोली

अरे ममता जी!! इतनी गजब का माल होकर आप ऐसी छोटी बाते करती है!! आप बस देखिये ममता जी! हम दोनों आपको डबल लण्ड से चोदेंगे और आपको मजा भी खूब आएगा! मैंने कहा। ममता का अब मनोबल बढ़ गया। दो दो लण्ड उसकी बुर में थे इस वक़्त। मैंने धीरे धीरे अब नीचे से अपना लण्ड चलाने लगा। उधर महेश भी हल्के हल्के लण्ड चलाने लगा।बड़ा मजा आ रहा था दोंस्तों। धीरे धीरे हम दोनों एक साथ लण्ड ममता की बुर में चलाने लगे। वो मम्मी मम्मी चिल्लाने लगी।
तेरी मम्मी आ गयी तो वो भी नहीं बचेंगी। हम दोनों उनको भी डबल लण्ड से चोदेंगे!! मैंने कहा। धीरे धीरे हम रफ्तार पकड़ने लगे। एक समय तो ऐसा आ गया दोंस्तों कि हम दोनों के लण्ड बड़े आराम से उसकी बुर में सरकने लगे, ममता की बुर को बड़े आराम से चोदने लगे। अब उसे दर्द नही हो रहा था।

मैं जान गया कि जोर जोर से लंबे शॉट मारने का सही वक़्त आ गया है। मैं और महेश हुकम हुमककर लंबे लंबे सचिन तेंदुलकर वाले शॉट्स मारने लगे। ममता मम्मी मम्मी करने लगी। हमने उसकी सित्कारे नजर अंदाज कर दी। हम दोनों तो कबसे चूत के प्यासे थे दोंस्तों। आज मौका मिला था। मैं नीचे से सट सट चोद रहा था और महेश ऊपर से खट खट चोद रहा था। लग रहा था जैसे ममता की चूत के अंदर दो तलवाले युद्ध कर रही हो। लग रहा था कहीं उसकी बुर फट ना जाए। पर मैंने इस तरह की डबल लण्ड की हजारों वीडियोस देखी थी। मैं अच्छी तरह जानता था कि किसी भी हसीन लौण्डिया को चाह्ये कितना भी चोद लो मगर उसकी बुर नहीं फट सकती।

दोंस्तों उस दिन मैंने और महेश ने 1 घण्टे एक साथ डबल लण्ड देकर ममता की बुर चोदी। उसकी बुर नहीं फटी। फिर महेश सबसे नीचे आ गया। उसने ममता की गाण्ड में तेल लगाकर लण्ड डाल दिया। मैं ऊपर से आया और मैंने भी ममता की गाण्ड में अपना लण्ड पेल दिया। बॉप रे!! ममता की तो माँ चुद गयी। अब महेश धीरे धीरे उसको चोदने लगा। जब गाण्ड रवा हो गयी तो मैं भी लण्ड सरकाने लगा। धीरे धीरे हम दोनों दोस्त एक साथ ममता को चोदने खाने लगे। पेलते पेलते हम तीनों के पसीने छूट गए। पर हमने चुदाई बन्द नहीं की।

महेश और मैं एक साथ डबल लण्ड देकर उसकी गाण्ड भी चोदने लगे। दोंस्तों उस दिन तो कमाल ही हो गया। 2 घण्टे हम दोनों से ममता की गाण्ड चोदी और झड़ गये। दोंस्तों, उस रात ये सिलसिला नहीं थमा। 7 8 बार हम दोनों से डबल लण्ड से ममता की बुर और गाण्ड चोदी।